
केरल की राजनीति में जो नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा था…वही अचानक चुप हो गया। Shashi Tharoor ने खुद ही अपने नाम पर ब्रेक लगा दिया—“ना मैं चुनाव लड़ रहा हूं, ना CM बन रहा हूं।” लेकिन सवाल खत्म नहीं हुए…बल्कि और खतरनाक हो गए हैं।
“मैं रेस में नहीं हूं”—थरूर का साफ संदेश
Shashi Tharoor ने साफ कर दिया—विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, मुख्यमंत्री पद की रेस में नहीं हैं।
उन्होंने कहा, “CM वही होना चाहिए जो विधायक चुना जाए।”
सीधी बात…और सियासत में सीधी बात अक्सर टेढ़ी कहानी छुपाती है।
फिर भी क्यों गरम है बाजार?
अगर थरूर रेस में नहीं हैं…तो चर्चा इतनी तेज क्यों? कांग्रेस में लीडरशिप का कन्फ्यूजन। UDF में अंदरूनी खींचतान। मजबूत चेहरे की तलाश। मतलब नाम बाहर, लेकिन असर अंदर।
“हर कोने में जाऊंगा”—प्रचार में बड़ा रोल
Shashi Tharoor ने साफ किया वो चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन पूरे केरल में कैंपेन करेंगे हर सीट पर एक्टिव रहेंगे। उनका कहना, “मैं एक सीट का नहीं, पूरे राज्य का खिलाड़ी हूं।”
85-100 सीटों का दावा: हकीकत या हौसला?
थरूर का बड़ा दावा कांग्रेस 85 से 100 सीट जीत सकती है। Kerala में कुल 140 सीटें हैं। यानी सीधे सत्ता की कुर्सी का टारगेट। लेकिन सवाल वही बिना CM फेस के ये मुमकिन है?

CM फेस नहीं—फायदा या नुकसान?
थरूर ने खुद माना CM चेहरा पहले घोषित करना फायदेमंद हो सकता है। लेकिन कांग्रेस की परंपरा पहले चुनाव, बाद में चेहरा। इसे कहते हैं
“पहले खेलो, फिर कप्तान चुनो।”
चुनाव का टाइमटेबल सेट
वोटिंग: 9 अप्रैल, रिजल्ट: 4 मई। अब मुकाबला सीधा UDF vs Left और बीच में थरूर का ‘Invisible Influence’।
भारत की राजनीति में दो तरह के नेता होते हैं जो कहते हैं “मैं हूं” और जो कहते हैं “मैं नहीं हूं”… लेकिन होते वही हैं। Shashi Tharoor दूसरी कैटेगरी में आते दिख रहे हैं।
क्योंकि जो रेस में नहीं होता… वो अक्सर गेम सेट कर रहा होता है। थरूर का नाम हटते ही चर्चा और तेज हो गई है।
एक बात तय है केरल चुनाव अब और दिलचस्प हो गया है।
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